दिव्यांगजन की नि:शुल्क बस यात्रा

दिव्यांगजन को राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की योजना:-

1. परिभाषा:-

इस योजना के अन्तर्गत जब तक विषय या संदर्भ में कोई बात विरूद्ध न हों।

  1. बसों में ऐसी साधारण बसें अभिप्रेत होंगी जो निगम द्वारा उसके अधीन उ0प्र0 की सीमा के अन्दर एवं प्रदेश की सीमा के बाहर विभिन्न मार्गो पर चलाई जाती हो। वायुशीतित, शयनयान, वातानुकूलित तथा वीडियोयुक्त बसों पर यह सुविधा लागू नहीं होंगी।
  2. ‘निगम’ उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम अभिप्रेत होगा।
  3. ‘राज्य’ से उ0प्र0 अभिप्रेत होगा।
2.

दिव्यांगजन को उ0प्र0 निःशुल्क यात्रा सुविधा उ0प्र0 सड़क परिवहन निगम की बसों से भिक्षावृत्ति से भिन्न प्रयोजन के लिये यात्रा करने पर दी जायेगी।

3.

यात्रा प्रारम्भ करते समय दिव्यांग व्यक्ति मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाणपत्र परिवहन निगम के अधिकृत कर्मचारी/अधिकारी को प्रस्तुत कर यात्रा प्रारम्भ कर सकेगा।

4.

उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम लखनऊ द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आवश्यक प्रमाणपत्र, जिसमें इस बात का उल्लेख होगा कि कितने दिव्यांग व्यक्तियों ने एक त्रैमास में निःशुल्क यात्रा सुविधा का उपयोग किया, के साथ मांग पत्र दिये जाने पर अनुमन्य धनराशि निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण द्वारा उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम को उपलब्ध कराई जायेगी।

5.

(1) यात्रा की सुविधा केवल मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाणपत्र के आधार पर ही दिव्यांगजन को ही दी जायेगी।

(2) यात्रा की सुविधा केवल उन्हीं दिव्यांगजन को देय होगीं जो निम्नांकित श्रेणियों में से किसी एक में आते हों:-

  1. जो पूर्ण रूप से अंधे हो या अल्पदृष्टि (लो विज़न) हों (दिव्यांगजन अधिनियम 1995 की परिभाषा के अनुसार)।

  2. जो पूर्ण रूप मूक हों, बधिर हों या दोनों हों (दिव्यांगजन अधिनियम, 1995 की परिभाषा के अनुसार)।

  3. जिनके एक हाथ व पैर या जिनके दोनों हाथ या दोनों पैर पूर्ण रूप से कटे हों।

  4. जिनके एक हाथ एवं एक पैर या दोनों हाथ या दोनों पैर अपंग (पैरालाइज्ड) हों।

  5. जो मानसिक रूप से मंद/रूग्ण हों। (दिव्यांगजन अधिनियम 1995 की परिभाषा के अनुसार)

  6. जो लेप्रोसी मुक्त दिव्यांग हों।

6.

मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा दिये गये दिव्यांगता प्रमाण-पत्र में यदि कोई दिव्यांग गम्भीर दिव्यांगता से ग्रसित है। अर्थात यदि व 80 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता से ग्रसित है तो उस दिव्यांग के एक सहयोगी को दिव्यांग की तरह ही निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।

7.

परिवहन निगम की बसों से दिव्यांग को पूरे वित्तीय वर्ष में यात्रा की सुविधा अनुमन्य होगी।

8.

नगर बस सेवा में भी यह सुविधा अनुमन्य होगी, यदि उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम सेवा संचालित करते हों।

9.

नियम 7 (2) के अंतर्गत उल्लिखित दिव्यांगजन को उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी।

10.

उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम को दिव्यांगजन पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति के लिये संबंधित विभाग के आय-व्ययक में व्यवस्थित धनराशि के अनुसार पारस्परिक सहमति से धनराशि का भुगतान निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा किया जायेगा।

11.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र का प्रयोग यात्रा सुविधा हेतु किया जायेगा।

12.

दिव्यांग द्वारा यात्रा करने पर परिवहन निगम का बस कंडक्टर दिव्यांग को मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त दिव्यांगता प्रमाण-पत्र देखने के पश्चात गंतव्य स्थान तक यात्रा की सुविधा उपलब्ध करायेगा। इस यात्रा का लेखा-जोखा यथासमय परिवहन निगम के कार्यालय में प्रस्तुत करेगा। उक्त निःशुल्क यात्रा के लिये जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी द्वारा दिव्यांगता प्रमाण-पत्र पर पंजीकरण संख्या, हस्ताक्षर व मोहर का अंकन किया जाना अनिवार्य नही होगा।

13.

जिला समाज कल्याण अधिकारी/जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी अपने यहाॅ एक रजिस्टर रखेंगे, जिसमें ऐसे दिव्यांगजन का उल्लेख होगा जो परिवहन निगम की बसों से यात्रा करने हेतु पात्र हैं।

14.

उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम प्रत्येक तीन माह पर लेखा विवरण तथा यात्रा करने वाले दिव्यांगजन की संख्या संबंधी विवरण निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण को उपलब्ध करायेगे।

15.

दिव्यांगता की जो परिभाषा यात्रा के लिये दी गई है, उस श्रेणी में आने के लिये यह आवश्यक होगा कि संबंधित दिव्यांग अपने जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी से दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्राप्त करें।

16.

इस यात्रा हेतु संबंधित दिव्यांग तथा उसके सहयोगी को यात्रीकर का भुगतान नही करना होगा।